काल का घेरा अंधेरा अंधेरा

 

काल का घेरा अंधेरा अंधेरा

जहाँ हम समझे कुछ नहीं. 

वहां बहुत कुछ है। 

जो तुच्छ से भी तुच्छ है. 

वह कहीं उच्च है।


जब करते हैं आख बन्द.

हो जाता है खत्म द्वंद।

ना कुरेदो घावों को.

मिट जाने दो भावों को।


कृष्ण रंग में डूबो जरा.

अपने अन्दर कूदो जरा।

ना रंग तेरा ना रुप तेरा.

ना रात तेरी ना धूप तेरा।


ना कोई बड़ा ना छोटा कोई. 

ना हम खोटे ना खोटा कोई। 

Ramprakash Patel


हम समझे नहीं 

क्या से क्या हो गए, 

हम जागे नहीं, 

जाकर फिर सो गए। 


हर चीज यहीं है 

हर चीज यहीं के। 

हम मानते हैं. 

कि हम हैं कहीं के। 


आईना नहीं मैं

आईने में हूँ मैं।

हो गई गलती

की हो गया तु मैं।


जहाँ मैं नहीं था 

वहीं तुम ही तुम थे।

यह सोच ना पाए

की तुम वहां क्यूँ थे।


जीवन का ऐसा होना 

सवेरा सवेरा। 

है काल का घेरा 

अन्धेरा अन्धेरा। 

Ramprakash Patel 


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