सुनाई दे दिखाई ना दे

 सुनाई दे दिखाई ना दे




सुनाई दे,

 दिखाई ना दे।

अपने वजूद की, 

सफाई ना दे। 


कोई आहट, है आई, 

ना दिखे परछाई। 

डरा हुआ, सहमा हुआ, 

है रूह मेरी घबराई। 


दोहरा रही थी, 

टप टप की आवाजें। 

एक ही सुर में, 

एक ही धुन में। 


जब घनी हुई, 

तब पता चला। 

एक परिंदा 

जा निकला। 


जिस डर के, 

हम डरे हुए,। 

हम जिंदा कहाँ, 

हम मरे हुए। 


जिस मौज के 

हम परिंदे थे। 

जिस कलरव में, 

हम जिंदा थे। 


अब सुनाई दिया है, 

दिखाई दिया है। 

लगता है कोई,

सफाई दिया है। 



वह जो टप-टप 

की आवाजें हैं। 

मेरे धडकन की

साजें हैं। 


पहचान लिया 

बड़ अजीब पाया। 

हृदय के, 

करीब पाया। 


अब और ज्यादा 

घना हो गया है। 

अब तो सब, 

अपना हो गया है। 


धड़कनों में 

लौटा परिंदा। 

जिस कारण हम 

हुए हैं जिंदा। 


डर ना कर, 

अब होश में आ। 

मौज मना, 

जोश मे आ। 


संगीत नया, 

हो गीत नया। 

प्रीतम नया, 

है प्रीत नया। 


Ramprakash Patel 

कविता की व्याख्या youtu.be video 







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