जहां शब्द फूटते हैं

 रिश्ते नाते, बनते हैं,

टूटते हैं।

हम वहां रह्ते हैं, जहां 

शब्द फूटते हैं।



जहां तारें बनते हैं,

बिखरते हैं टूटते हैं। 


हम वहां रहते हैं, जहां 

शब्द फूटते हैं। 


जहां एक होकर, 

घूमती हैं भावनाएं, 

असलियत है कि 

वो हैं आत्मायें। 


जहां उत्पन्न हुआ, 

जहाँ यह सारा। 

क्या हम, क्या हमारा, 

क्या तुम, क्या तुम्हारा। 


जहां फूल खिलते हैं, 

बीज टूटते हैं। 

जमीन को छुते है, 

अंकुर फूटते हैं। 


हम वहां रहते हैं, 

जहां शब्द फूटते हैं। 

Youtube 


जहां तार जुड़ी

हर दिल की। 

जहां की हर शाम 

किसी महफिल की। 


जीस खुदा की तुमको, 

नाज़ है वह खुदा

 काम ना आएगा। 

रुख किधर होगा, 

कभी ना तय कर 

यह वक़्त बतायेगा। 


कहीं दूर नहीं, 

मेरा ठिकाना। 

आसान है करना 

यहां आना जाना। 


शांत, निशब्द 

हो जाना तुम मौन। 

खुद से पूछना, 

खुदा मै हूँ कौन। 


तुम भी रुठते हो, 

हम भी रूठते हैं। 

वहां के जूडे धागे, 

नहीं टूटते हैं। 


हम वहां रहते हैं, जहाँ 

शब्द फूटते हैं। 

Ramprakash Patel 



Deshi_Recipe_with_Anita


Deshi recipe with Anita 



एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ